हज़ारों ऐब हैं मुझ मे नहीं कोई हुनर बेशक .......... मेरी खामी को तू खूबी मे तब्दील कर देना मेरी हस्ती है खारे समुन्दर सी मेरी राधे तू अपनी रहमतों से ....... इसे मीठी झील कर देना .............जय ­ श्री राधे !! जय श्री श्याम...